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ठंड़ी हवाएँ

फूलों की खोई महक फिर लौट आई ठंड़ी हवाओं में
मिट्टी की खुशबू फिर से फैलने लगी ठंड़ी हवाओं में
बारिश की बूँदों में भीगे पत्ते और हरे लगने लगे
हंगाम ए बरसात आए, दिल झूम उठा ठंड़ी हवाओं में

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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