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Showing posts from December, 2010

Let's play

With Srebrenica and Prizren,
old Banja Luka shot to fame:
the grounds for a jolly new game,
played over and over again.
The rule was to chop a man when
he had a good Bosniak surname;
If he had a Serb-sounding name,
the rule was to rape his women.

Let's find a foe, make his blood spill,
and gloat over his dying scream;
we will emerge victors won't we?
To build muscles, to bolster will,
to strengthen the bonds of the team,
let's play genocide, you and me.

जंग के नगाड़े

ਜੋ ਜੰਗ ਦੇ ਨਗਾੜੇ ਵਜਦੇ ਹਨ, ਅਮਨ ਦੀ ਸਾਜ਼ ਹੋ ਤੁੱਸੀ
ਇਲਜ਼ਾਮਾਂ ਦੀ ਕ਼ਤਲ-ਏ-ਆਮ ਵਿਚ ਸੁਕੂਨ ਦੇ ਅਲਫ਼ਾਜ਼ ਹੋ ਤੁੱਸੀ|
ਖ਼ਾਨਾਬਦੋਸ਼ ਨਹੀਂ ਓੜ੍ਹੋ ਤੁੱਸੀ ਪਰਦਾ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਦਾ
ਇਨ ਕੋਹਰੇ ਦੇ ਰੇਗਿਸਤਾਨ ਵਿਚ ਕ਼ਨੁਨ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਹੋ ਤੁੱਸੀ||

जो जंग के नगाड़े बजते हैं, अमन की साज़ हैं आप,
इल्ज़ामात के क़त्ल ए आम में, सुकून के अल्फाज़ हैं आप|
ख़ानाबदोश न ओढ़ियेगा परदा ख़ामोशी का,
इन कोहरों के रेगिस्तान में, क़नून की आवाज़ हैं आप||

हमसफ़र

इन सितारों से चकाचौन्द आसमान में, चान्द भी क्या कभी तन्हाई महसूस करता है, क्या वह भी हमसफ़र के इन्तेज़ार में सिसकता है?

अगर काँटा ही समझेंगे

हमें गुलदाउदी समझिये, बाग़ान में बहार ले आइये; या महज़ गुल ही समझकर अपने ज़ुल्फ़ों की निख़ार बढ़ाइये| अगर काँटा ही समझेंगे, तो उससे भी सहमत है ख़ानाबदोश, बतौर सूई अपने आशिक़ के ख़तों का मुख़्तियार बनाइये||
हमें गुलदाउदी समझकर, हम ही से गुलिस्तान सजाइये; या गुल ए अहमर समझकर अपने ज़ुल्फ़ों को बाग़ान बनाइये| अगर काँटा ही समझेंगे, तो उससे भी सहमत है ख़ानाबदोश, बतौर सूई अपने आशिक़ के ख़तों का निगेहबान बनाइये||
(यह और भी अच्छा बन सकता है, क्या आप मदद फ़रमाएँगे?)

जशन

हर साँस को जाम ए शबाब गर मान ले,
तो जीना हर पल जशन है जान ले|
ना दौड़ है ना होड़ है ख़ानाबदोश,
गर हैवान को भी तू इनसान मान ले||

दर्द

किसी सेहतमन्द से न करो मुलाक़ात मेरी, उसे जीना क्या मालूम जिसने कोई दर्द ना पाला!

यारों-दोस्तों से...

यारों-दोस्तों से ज़रा होशियार, रंग कब बदल जाएँ वह ख़ुद नहीं जानते| दुश्मनों के लिए रखो कुछ प्यार, मुहिब्ब कब बन जाएँ वह ख़ुद नहीं जानते||