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लम्हा , ﻟﻤﮩﺎ


ﮨﺮ ﻟﻤﮩﺎ ﺍﹽﻣﻴﺪ ﺍﺑﮭﺮﻛﮯ ﻣﺮﺟﮭﺎﯼ
ﻛﻪ ﺗﻢ ﺁﻭﮔﯽ ، ﺍﺑﮭﯽ ﺗﻢ ﺍﻭﮔﯽ
ﻟﻤﮩﺎ ﻟﻤﮩﺎ ﺟﺘﻜﮯ ﺯﻣﺎﻧﻪ ﺑﻨﮯ
ﻧﺎ ﺗﻢ ﺁﻳﯽ ﻧﺎ ﺗﻤﮭﺎﺭﯼ ﭘﺮﭼﮭﺎﯼ
ﺁﺧﺮ ﺟﺐ ﺍﹽﻣﻴﺪ ﮨﺎﺭﻛﮯ ﻭﺍﭘﺲ ﻣﮉﺍ
ﺑﺎﺭﺵ ﻛﯽ ﺑﻮﻧﺪﻭﮞ ﺳﯽ ﺗﻨﮩﺎﺭﯼ ﺍﻭﺍﺯ
ﮨﻠﻜﯽ ﮨﻠﻜﯽ ﺳﯽ ، ﭨﭙﭩﭙﺎﻧﮯ ﻟﮕﯽ
ﭘﹷﻴﻤﺎﻧﺎ ﺑﮭﺮﺍ ، ﻣﹷﻴﮟ ﺧﻤﺎﺭ ﮨﻮ ﮔﻴﺎ


हर लम्हा उम्मीद उभरके मुरझाई
कि तुम आओगी, अभी तुम आओगी
लम्हा लम्हा जुतके ज़माना बने
ना तुम आई ना तुम्हारी परछाई
आख़िर जब उम्मीद हारके वापस मुडा
बारिश की बूँदों सी तुम्हारी अवाज़
हलकी हलकी सी, टिपटिपाने लगे
पैमाना भरा, मैं ख़ुमार हो गया

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