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नज़ाकत

वह नहीं कहती, यह उनकी शराफ़त है,
मैं नहीं कहता, यह मेरी बुस्तदिली है|
बेमतलब 'ख़ाना बदोश' लफ्ज़ों का क्या काम,
न कहे कह देना, इश्क़् की नज़ाकत है||

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