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ग़ुस्सा

दुनिया की ज़िल्लत पर ग़ुस्सा करता था,
अमन की तलाश में भटकता फिरता था,
एक दिन ज़माने ने ज़ुल्म करना छोड़ दिया,
उसी रोज़ जब ग़ुस्सा करना छोड़ दिया था

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