Wednesday 29 April 2009

Fruit

Ugly brown pods
replace red gulmohur flowers.
Summer: time to fruit.

Magic

However old, a
blooming tree is always young.
Flowers make magic.

Gulmohur

Gulmohur blossoms,
trees turn into giggling girls.
Spring can make stones hope.

Cliffs

Barren cliffs painted
gold in the morning's new light.
Sunbeams gladden all.

White flowers

White flowers shine
as the veil of night lifts gently.
Dawn erupts with joy.

Tuesday 28 April 2009

Fall

Laburnum blossoms
fall, gay yellow turns hush green.
Springs yields to summer.

Summer

What wonder summer
that drives a beer worshipper
to seek water?

Circumstances

Is it not strange that
circumstances can make you
love the things you hate?

Monday 27 April 2009

Window

Children in a bus
make much more magical the
view from the window.

Memory

I am a pebble,
the memory of what was
once a mighty rock.

I am a brown leaf,
the memory of what was
once a great banyan.

I am small,
and yet I am big.

Visapur

Visapur: once
invincible, now conquered
by amateur trekkers.

Consequences

Consequences - I
conquer a mountain, now the
knees hurt climbing stairs.

You

It is difficult
to be in love with you and
be a misanthrope.

End

Dead tree trunk amidst
florid green vegetation.
All things end someday.

Saturday 25 April 2009

மல்லிகை

அக்னி நட்சத்திரத்தில் மலரும்
மல்லிகைதான் அழகு.

வெள்ளை மேகம்

ஒரு சொட்டு மழை இல்லாத
வெள்ளை மேகம் எதற்க்காக?

உன் கண்கள் சொல்லும் கதை

உன் முகத்தில் படித்தேன் உன் கண்கள் சொல்லும் கதை.
நீ சொல்லமல் தெரிந்தேன் உன் கண்கள் சொல்லும் கதை.

உன் புன்னகையின் பாட்டில், உன் சிரிப்பின் பாவத்தில்,
ஏழிசைச் சேற்த்துக் கேட்டேன், உன் கண்கள் சொல்லும் கதை.

Jewel

It's purpose over,
the tempting jewel lies
abandoned on a desk.

White clouds

What use have I for
haughty white clouds, only lowly
black ones bring rain.

High white clouds

The first monsoon blows
high white clouds that bear no rain.
Not all winds bring change.

Petals

Two days of beauty
float away to oblivion
as petals are shed.

Bougainvillea bract

White Bougainvillea
bract floats down gently like a
gem, it's use over.

बीज - ‍एक खेल

ज़मीन खोदा,
बीज बोया,
वह फूटा
किसमत का मारा,
न बारिश आयी
न पानी डाला,
चमन उजडा,
क़सूर का खेल
क्या खेलें,चल चिलम
भरते हैं |

या

ज़मीन खोदा,
बीज बोया|
सुबह आयी,
न तूने पानी डाला
न मैंने|
क़सूर का खेल
खेल लिया,
चल चिलम
भरते हैं|
कल नया बीज होगा
नया खेल|

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Thursday 23 April 2009

Magpie robins

Magpie robins in
a garden full of colours.
Simple contrasts please.

Jamun tree

Birds, bats, boys and rats
raid the fruiting jamun tree.
True joy blesses all.

Nuit du vent

Donne-moi une nuit du
vent doux comme prix pour le
travail honnête d'un jour.

Mango Juice

Thick mango juice
flowing down the neck numbs the
pain of the farmer's stick.

Silver Lining

The silver lining
has a tendency to make
one forget the cloud.

Tuesday 21 April 2009

Rice

Rice: half-centimetre
of grain that sustains a
billion and a half.

Karaikudi

Karaikudi: whose
streets I roamed as a child,
striking roots where I went.

Idlis

Idlis: fluffy cakes
that send South Indians into
an ecstatic trance.

Dosa

Dosa: a flat white
thing made of rice that makes the
eater rather round.

Saturday 18 April 2009

Lion

See the lion in
the cage - the monkey's fear
overcome by man.

Mirror

There are always people
in front of a mirror
- and a monkey cage.

Poetry

Strange thing poetry
- one wants to write it in joy,
more so in sorrow.

Poets

Poets are strange folk -
they will break coitus to write
a rhyme they have found.

Iodoform

Expressionless sonnets
evoke the pale green smell
of iodoform.

Pyjama string theory

Pyjama string theory
can't explain why it
won't get the Nobel.

Friday 17 April 2009

The sleep that comes to all

I am the candle's dimming glow,
I am the quake that fells the tower.
I am the rust that blunts the plough,
I am the graceless fall from power.

I am the vine-enwreathed bower.
I am the silent stringless lyre.
I am the heat that wilts the flower,
I am the damp that stills the fire.

I am the end of all desire,
I am the ceaseless rest all crave.
I am the flagrance of the pyre,
I am the repose of the grave.

I am the ash to which ye fall,
I am the sleep that comes to all.

Ebbs

Summer river ebbs.
Tree roots die, seeds lay dormant.
Death makes space for life.

Monsoon winds

Waving palms rejoice,
fist monsoon winds drive out heat.
Life reclaims death's claims.

Summer night

Summer night – still
and mirthless as the breeze dies down.
First joy is short-lived.

फ़ासलों को नज़दीकी में तबदील करना

तुम्हारी अवाज़ को क़ैद करके मुझ तक पहुँचाने में कमाल करती है,
पर टेलिफ़ोन की तार क्या जाने फ़ासलों को नज़दीकी में तबदील करना|
वह शायर जो तुम्हारे हर अहसास को अपनी नज़्म में बयान करे,
वह अल्फ़ाज़ का सौदागर जाने फ़ासलों को नज़दीकी में तबदील करना||

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Wednesday 15 April 2009

Laburnum

Boldly laburnum
flowers paint summer yellow.
Heat kills, heat gives life.

Flame of the Forest

Flame of the forest:
orange blooms that cool summer.
Irony cheers life.

Tuesday 14 April 2009

Flowers

Pink, white and yellow,
flowers mock summer torpor.
Truth: always coloured.

Thursday 9 April 2009

Naked bums

Naked bums on
railway tracks: unwittingly
poverty moons progress.

Vanity

A toothless elephant
polishes his tusks -
hurrah for vanity!

मोर के पँख

देखो यह मोर के
पँख - उडने के चार, दिखाने
के डेढ़ हज़ार

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Sleep

Some dread me, some seek.
Some feign I exist not - the
sleep that comes to all.

Poetry

Spring joy or deadly
summer heat, poetry - the
pervert - thrives in both.

Butterflies

Spring butterflies make
for good poems. Summer kills,
making more poems.

Poetry

Poetry is like
a fungus - living off the
living, and the dead.

Sunday 5 April 2009

तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ

दो पल का साथ फिर ज़िन्दगी तन्हा, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|
दर्द फुग़ान हो जाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 1

हवाएँ चुपके से कहती हैं कि मिलन की रुत आई तुम कहाँ हो,
पर तुमसे बिछडने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 2

तुम आओगी, बोलोगी, हँसोगी, बडबडओगी, चली जाओगी,
रुख़सत में तड़पने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 3

मेरे साँसों में अपनी ख़ुशबू छोड जाओगी, वह बहकाता रहेगा,
उस याद में सिसकने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 4

घर आओगी तो बातें मत करना, दीवारें सुनकर देर दोहराएँगी,
वह गूँज सुनकर रोने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 5

किसी चीज़ को हाथ मत लगाना, मेरा इबादतख़ाना भर गया है,
यह इख़लास चूकने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 6

नज़राने मत दिया करो, शुक्रिया कहना मेरे बस की बात नहीं,
ज़िन्दगी कम पडने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 7

तुम्हारी याद से पैर ज़मीन पर नहीं टिकते, तुम्हारा दीदार तौबा,
ख़्वाब टूटकर गिर जाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 8

हलकी बारिश की बूँदें फिर तुम्हारी आँसुओं की याद दिलाती हैं,
इन्हें न समझने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 9

सोचता हूँ कि तुम्हारा हँसना या रूठना मेरे होश को भुला देगा,
तुमसे बातें करने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 10

सीरत की कमियाँ तुमसे क्या छुपाऊँ, यह आँखें ढूँड ही लेती हैं,
इन नज़रों में गिरने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 11

न जानूँ मैं कभी, किस बात पर तुम खुश होती हो, और किस बात पर ख़फा,
तुम्हे न समझने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 12

ऐ हसीन यह नाम तुम्हारा, इससे इतराने से नहीं थकते यह होंठ,
यह मिठास पिघलने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 13

तुम्हारी देहलीज़ पार करके लगता है के जन्नत में दाख़िल हुआ हूँ,
यह ख़्वाबगाह उजड़ जाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 14

अपनी तारीफ़ किसी सुख़ानवर से करवाओ, मुझसे तो नहीं होगा,
अल्फ़ाज़ का साथ छूटने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 15

तुम्हारा हर नुख़्स सोने और चान्दी के वरक़ से छुपाया है मैंने,
यह नक़ाब उतरने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 16

तुम राग छेडती हो तो परिन्दे गुनगुनाना छोडकर सुनने लगते हैं,
यह समा बिखरने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 17

तुम पलकें झुकाकर देखती हो तो हर मन्ज़र से अन्धा हो जाता हूँ,
इन आँखों के खुलने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 18

काँच की छूडियाँ मत पहना करो, टुट गयीं तो खरोंच पड जाएगी,
आहट न सह पाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 19

तुम क़ाफ़िया, तुम रदीफ़, तुम बहर हो, यह ग़ज़ल मेरा तुम पर क़ुरबान,
अल्फ़ाज़ न पिरोने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 20

ख़ानाबदोश को क्या मुकाम हासिल, मंज़िल हाज़िर होते भी हूँ फ़ना,
तुम्हे पाकर खोने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ| 21

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Friday 3 April 2009

रुख़सत

तुम बुलाती हो तो मुलाक़ात से मैं मुकर जाता हूँ
मेरे इश्क़ पर शक़ ना करो, पर रुख़सत से डर जाता हूँ

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

कुदरत

वालदा कुदरत से क्या डरना,
कभी तो जान देना है,
जिस वालदा ने पैदा किया,
उसी ने जान लेना है!

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Thursday 2 April 2009

Hope

A coconut starts
on a transoceanic trip
driven just by hope.

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