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Showing posts from December, 2008

यथा दृष्टि तथा सृष्टि

यथा दृष्टि तथा मात्रा
यथा मात्रा तथा विद्या
यथा विद्या तथा सृष्टि -
यथा दृष्टि तथा सृष्टि |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

जुनून

अह्ल ए हकम की शाबाशी कभी हासिल न हो,
किसी तारीफ़नमे का दीदार कभी न हो,
पर करामात इतना छोड जाएँगे,
के लौह-ए-असल पर दर्ज रहेगा,
के मेहनत कभी कम नहीं हुई,
के जुनून कभी कम नहीं हुई |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

बिन बहर के ग़ज़ल

बिन जुनून के चाहत ऐसी, बिन बहर के ग़ज़ल जैसी,
बिन इज़्तिराब के 'श्क़ ऐसी, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

हर लफ़्ज़ हर याद में ढूँढता हूँ, तुम्हारी आवाज़ की सरगम,
हर बात बेमतलब लगती है, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

वक़्त के भुलाए ख़्वाब जैसे, बिन महक के फूलों जैसे,
ज़िन्दगी बेजान लगती है, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

ख़ामोशी के आसमाँ से आँसुओं की बारिश गिरा दे
बिन बादल के फ़लक ऐसे, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

इन सुनसान दीवारों पर अपनी हंसी के रंग चढा दे,
बिन पनाह के मकान ऐसे, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

लडखडाओ, डगमगाओ, झलक दो के तुम इन्सान हो
बिन जज़्बे के आँखें ऐसे, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Ghazal in progress

Desire that has no passion, is like ghazals that have no beher.
Longing that is not restless, is like ghazals that have no beher.

In songs, in sounds, in music, these ears seek out the notes of your voice,
All speech to them is meaningless, like ghazals that have no beher.

Like a flower that has no fragrance, like a memory robbed by time,
Life passes in dull soullessness, like ghazals that have no beher.

From the heavens of silence pour down a gentle rain of tears,
Cloudless the sky's vast emptiness, like ghazals that have no beher.

Fill these barren chambers with the many colours of your laughter,
This house stands sombre, shelterless, like ghazals that have no beher.

Populate the darkness with stars, tiny orbs of twinkling delight,
Else there is just blank mirthlessness, like ghazals that have no beher.

Step across my threshold, and purge my home of its melancholy,
Else 'Wanderer' remains homeless, like ghazals that have no beher.