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Showing posts from September, 2008

वक़्त

मंज़िल बदल जाते हैं वक़्त के साथ, ख़्वाहिश नहीं बदलती
ख़ुराक़ बदल जाते हैं वक़्त के साथ, तलब नहीं बदलती
पेशे बदल जाते हैं वक़्त के साथ, थकान नहीं बदलती
तुम बदलोगे, दुनिया बदलेगी, नसीब होगा सिर्फ़ सिफ़र
हंगाम बदल जाता है वक़्त के साथ, हालात नहीं बदलते |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

Six Elderly Aunts

Six elderly aunts had I
Six nagging, bragging souls.
At family weddings I
Am the poor one they'd hold.

"You're next, you're next!" they tease me
"You're next in line to go!"
"Tied up in matrimony,
You'll not long be solo."

"We'll tie you with apron-strings,
Bind you with bridal charms.
We've found you a homely girl
Who with her smile disarms!"

Six elderly aunts had I
Six nagging, bragging souls.
Then Aunt Maragatham died,
For age must take its toll.

The five left are now solemn,
There's wedding talk no more.
"You're next, you're next!" I tell them,
"You're next in line to go!"

आ'इने वक़्त

ख़्वाहिश ए कौम की आवाज़ सुनो, आ'इने वक़्त में झांक के देखो|
मुहिब्ब ए जान हो तो गौर करो, आ'इने वक़्त में झांक के देखो|

आवाज़ यह मौजूद ज़माने की, गली‍ गली में गूँजती है|
सदा ए महकूम है इनक़िलाब, आ'इने वक़्त में झांक के देखो|

बादशाहों के ताज समन्दर की लहरों पर सफ़ेद झाग है
जो बहाकर ले जायेगी सैलाब, आ'इने वक़्त में झांक के देखो|

अपने नाम के मोहर पिघला दे, रुतबा सिर्फ़ आल्लाह का होगा|
याद रखना वह माँगेगा हिसाब, आ'इने वक़्त में झांक के देखो|

जला दो अपने फ़तवे फ़रमान, नकार दो यह शौक़त ओ शान
कितने दिन तक रहेगा शबाब, आ'इने वक़्त में झांक के देखो|

रौब‍-रुबाब जमाते-दिखाते, नज़रन्दाज़ न कर देना
इन सरगर्मियों के इज़तिराब, आ'इनेवक़्तमेंझांककेदेखो|

ज़मीन कांपते गिरेंगे महल, आग लगते जल जाएँगे ताज
तब भी करोगे इतना मक़ताब? आ'इनेवक़्तमेंझांककेदेखो|

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

तोहफ़ा

महफूज़ रखेंगे आपके तोहफ़े,
जो दर्द दिये, जो सितम दिये;
‍ग़‌म नहीं के तुमने ग़‌म दिये,
ग़‌म यही के तुमने कम दिये|

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|