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आज बरसों के बाद जामुन पर फल उग आए

धयाल, बुलबुल, मैना और कोतवाल फिर झूमे, आज बरसों के बाद जामुन पर फल उग आए|
छोटे-छोटे से काले रंग के बूँद पनपे, आज बरसों के बाद जामुन पर फल उग आए|
फिर डाल-डाल पर बच्चे शोर करेंगे, बच्चे-बच्चे के गले से नीला रस टपकेगा|
मेरे बाग़ में ज़िन्दगी की चहल लौटी, आज बरसों के बाद जामुन पर फल उग आए|

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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