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न लगे शेर ख़त्म हुआ

कभी वाह वाह मत करना, लगता है शेर ख़त्म हुआ|
कभी इरशाद मत माँगना, लगता है शेर ख़त्म हुआ|
इन ख़ाना बदोश अल्फ़ाज़ों को मचलते रहने दो,
तुम भी कुछ लफ़्ज़ पिरोना, न लगे शेर ख़त्म हुआ||

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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