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बूँदें

आसमान में है, हवाओं में है,
आज बरसेगी, फ़िज़ाओं में है| 2
सूरज ढका है, रौशनी मन्द है,
बूँदों का वायदा, बादलों मे‍ है| 2

परिन्दे चुप हैं, सिर्फ कोयल गा रहे हैं,
ऐ काले बादल, कब वायदा निभाओगे?
पत्ते नसीम में इस आस से झूम रहे हैं
ऐ जान देने वाले पानी कब बरसोगे?

आसमान में है, हवाओं में है,
आज बरसेगी, फ़िज़ाओं में है| 2
सूरज ढकी है, रौशनी मन्द है,
बूँदों का वायदा, बादलों मे‍ है| 2

दिन बढ़ी, बादल बिखरे, सूरज फिर भड़का,
"मैं आसमान का मीर, मुझे क्या छुपाओगे?"
प्यासे बीज गिड़गिड़ाते हैं, "ऐ धोकेबाज़,
सावन आ गया, और कितना सताओगे?"

आसमान में है, हवाओं में है,
आज बरसेगी, फ़िज़ाओं में है| 2
सूरज ढकी है, रौशनी मन्द है,
बूँदों का वायदा, बादलों मे‍ है| 2

आँखों में यह आस बनी रही कि आज तो
क़ौस ए क़ज़ा लाए सात रंगों का सरगम |
शाम ढलकर रात हुई, तब अब्र घने हुए,
आखिर बूँदें गिरीं, मद्धम, मद्धम, मद्धम |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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