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ग़ैर

दुश्मन मेरा कोई नहीं, दोस्तों के बग़ैर हूँ;
एहसान मेरा सब पर है, प‌र पनाह के बग़ैर हूँ;
बद्दुआ है कि मैं फिरता रहूँ 'ख़ाना बदोश'...
किसि शहर से ग़ैर नहीं, हर शहर में ग़ैर हूँ |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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