Monday 16 August 2010

दोस्ती

दोस्ती करना भी तो निभाना है,
कभी डायरी में हमेशा ख़ामोश
एक नाम दर्ज है,
कभी ट्रेन में घण्टे भर की गुफ़्तगू
को ही याराना मान लिया

3 comments:

nilesh mathur said...

क्या बात है, बहुत सुन्दर !

किलर झपाटा said...

फ़ालतू बातों से ब्लॉगिंग नहीं चलती मिस्टर समझे के नहीं आप। कुछ काम की बातें कहो यार। इतना बड़ा मंच मिला है, आपको । इसका फ़ायदा क्यों नहीं उठाते ?

Ozymandias said...

धन्यवाद, निलेश

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