Saturday 24 October 2009

तुम आए

तुम्हारे नाम
पाठ पढ़े, व्रत रखे,
मन्दिरों में यग किये
पर तुम न आए
तुम्हारे नाम
रोज़े रखे, सजदे किये,
मक़बरों में चादर चढ़ाए
पर तुम न आए

दिल को मना लिया
के तुम न आओगे
आशाएँ दबाए
हौँसले छोडे
तब तुम आए

तुम आए
मुस्कुराए
कुछ कहे बिना
चले गए

फिर से मैंने
व्रत रखे, सजदे किए
ग़रीबों में अनाज बाँटे
पर तुम न आए

फिर मैंने सपने बिखेरे
तमन्नाएँ दफ़नाए

फिर तुम आए, मुस्कुराए,
राज़ें फुस्फुसाए
कुछ कहे बिना
चले गए
तुम दगा दोगी समझकर
मैंने अपने गीत मिटाए
अपने नज़्म जलाए

एक नया बाग़ बसाया
नए फूल उगाए
नया कल्पवृक्ष खडा किया
तुम्हें भूला
तुम्हारी यादों को दफ़नाया

उस वक़्त तुम आए
बिजली बनकर आए
तूफ़ान बनकर आए
आकर मेरा बाग़ उजाडा

और फिर कुछ कहे बिना
चले गए

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