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दर्द

किसी सेहतमन्द से न करो मुलाक़ात मेरी,
उसे जीना क्या मालूम जिसने कोई दर्द ना पाला!

Comments

Sourav Roy said…
जान कर सच में ख़ुशी हुई कि आप हिंदी भाषा के उद्धार के लिए तत्पर हैं | आप को मेरी ढेरों शुभकामनाएं | मैं ख़ुद भी थोड़ी बहुत कविताएँ लिख लेता हूँ | हाल ही में अपनी किताब भी प्रकाशित की | आप मेरी कविताएँ यहाँ पर पढ़ सकते हैं- http://souravroy.com/poems/
Ozymandias said…
बहुत धन्यवाद, सौरवजि!