Friday 3 December 2010

दर्द

किसी सेहतमन्द से न करो मुलाक़ात मेरी,
उसे जीना क्या मालूम जिसने कोई दर्द ना पाला!

2 comments:

Sourav Roy said...

जान कर सच में ख़ुशी हुई कि आप हिंदी भाषा के उद्धार के लिए तत्पर हैं | आप को मेरी ढेरों शुभकामनाएं | मैं ख़ुद भी थोड़ी बहुत कविताएँ लिख लेता हूँ | हाल ही में अपनी किताब भी प्रकाशित की | आप मेरी कविताएँ यहाँ पर पढ़ सकते हैं- http://souravroy.com/poems/

Ozymandias said...

बहुत धन्यवाद, सौरवजि!

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