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यारों-दोस्तों से...

यारों-दोस्तों से ज़रा होशियार, रंग कब बदल जाएँ वह ख़ुद नहीं जानते|
दुश्मनों के लिए रखो कुछ प्यार, मुहिब्ब कब बन जाएँ वह ख़ुद नहीं जानते||

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