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परदे के पीछे रोये

दीवान-ए-आम में हँसते रहे, परदे के पीछे रोये,
पर क्या रोना क्या हँसना, जिसके दरबार में परदे ही नहीं?

Comments

Udan Tashtari said…
spellings ठीक कर लें..है बेहतरीन!
Ozymandias said…
Thank you, Udan Tashtari! Aap zara madad kar denge?
बहुत सुन्दर...
ana said…
बहुत सुन्दर रचना ..........