Wednesday 3 November 2010

सपने

कुछ सपने पूरे होंगे, और बहुत अधूरे,
कुछ सपने सपने ही रह जाएँगे|
लेकिन उस चिराग़ को कभी बुझने मत देना,
जिसक रौशनी से सपने दिखते हैं|

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