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बीज - ‍एक खेल

ज़मीन खोदा,
बीज बोया,
वह फूटा
किसमत का मारा,
न बारिश आयी
न पानी डाला,
चमन उजडा,
क़सूर का खेल
क्या खेलें,चल चिलम
भरते हैं |

या

ज़मीन खोदा,
बीज बोया|
सुबह आयी,
न तूने पानी डाला
न मैंने|
क़सूर का खेल
खेल लिया,
चल चिलम
भरते हैं|
कल नया बीज होगा
नया खेल|

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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