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पगडन्डियाँ

फिर मिलीं पगडन्डियाँ और फिर मिलीं वह रंजिशें,
फिर मिलीं मोहब्बतें, वह इश्क़ में झूमती बारिशें,
जो वह दर बस्ता हैं अब क्या वापसी ख़ाना बर्दोश
रह गयी हैं ख़्वाहिशें, बस रह गयी हैं ख़्वाहिशें

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