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युद्ध आवश्यक है

हाँ युद्ध आवश्यक है।
किन्तु न मेरी पत्नी विधवा हो, न मेरे सन्तान अनाथ।
मेरे माता पिता अपने जीवन का अन्तिम पड़ाव
मेर पासिंग आउट परेड के सॅल्यूट वाले फोटो को देख,
सिसक सिसक के न बिताएँ।

युद्ध तो आवश्यक हैं।
पर मेरा कैरियर भी आवश्यक है।
वह यू एस का वीज़ा, वह वी पी का ओहदा
वह थाइलैंड का ... जो भी थाइलैंड में होता है।
और वह पाँच करोड का फ्लैट सागर किनारे।

आवश्यक है, आवश्यक है युद्ध।
मेर जानता हूूँ कि सिपाही सियाचेन में
ठण्ड और तूफान से जूझते
या एल ओ सी पर अचानक गोलीबारी से
या आतंकियों से निर्भय भिडकर
राष्ट्र के रक्षा में अमर हो जाते हैं,
पर मेरा उत्तरदायित्व भी मैंने निभाया है
और फेसबुक एवं ट्विटर पर सदैव
कोटि कोटि श्रद्धाँजली अर्पित की है।

युद्ध तो आवश्यक हैं।
परन्तु यह मेरे भाग्य में नहीं कि सीमा पर
सुबह के तीन बजे ठण्डा चाय का प्याला पकडे
नीन्द से जिहाद लडूूँ, न बाॅडीं आर्मर पहनकर
(अगर मिल जाए) रेग़िस्तान पर तपती धूप
से क्रूसेड करने निकल पडूँ। और किसी यू एन
शान्ति मिशन में रुवान्डा की सैर करना
तो भूल ही जाओ। हम गोवा से काम चला लेंगे।
पर हाँ युद्ध आवश्यक है।

Published in Amaravati Poetic Prism 2017
ed. Padmaja Iyengar,
Cultural Centre of Vijayawada & Amaravati

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உன்னைத் தேடும் கண்கள்

நீ வருவாய், நீ வருவாய், உனை நினைத்து ஏங்கும் கண்கள்
கடற்க்கரை நாடும் அலைகளைப்போல் உனைத் தேடும் கண்கள்

மணத்தில் மயங்கி, மலரைத் தேடிக்கொண்டு இங்கும் அங்கும்
அலையும் ஒவ்வொரு பட்டாம்பூச்சிப்போல் உனைத் தேடும் கண்கள்

மலை இறங்கி, நிலம் தாண்டீ, கரை எங்கே கரை எங்கே
கடலைத் தேடீக்கொண்டு ஓடும் ஆறுபோல் உனைத் தேடும் கண்கள்

கடலிருந்து காற்றை வ்ழி கேட்டு, வானை வழி கேட்டு,
புவியை தேடி வரும் கார்முகில்போல் உனைத் தேடும் கண்கள்

ஆயிரம் ஆண்டு ஒரே வேட்கையில் தனை எரித்துக்கொண்டு
ஆதவனைச் சுற்றி வரும் வால்மீன்போல், உனைத் தேடும் கண்கள்

உனை புகழ சொல் இல்லாமல் இருக்கிரான் 'வழிப்போக்கன்',
கண்ண்னைத் நாடி பாடிய மீராப்போல், உனைத் தேடும் கண்கள்

Published in Amaravati Poetic Prism 2016
ed. Padmaja Iyengar,
Cultural Centre of Vijayawada & Amaravati

बिन बहर के ग़ज़ल

बिन जुनून के चाहत ऐसी, बिन बहर के ग़ज़ल जैसी,
बिन इज़्तिराब के 'श्क़ ऐसी, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

हर लफ़्ज़ हर याद में ढूँढता हूँ, तुम्हारी आवाज़ की सरगम,
हर बात बेमतलब लगती है, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

वक़्त के भुलाए ख़्वाब जैसे, बिन महक के फूलों जैसे,
ज़िन्दगी बेजान लगती है, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

ख़ामोशी के आसमाँ से आँसुओं की बारिश गिरा दे
बिन बादल के फ़लक ऐसे, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

इन सुनसान दीवारों पर अपनी हंसी के रंग चढा दे,
बिन पनाह के मकान ऐसे, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

लडखडाओ, डगमगाओ, झलक दो के तुम इन्सान हो
बिन जज़्बे के आँखें ऐसे, बिन बहर के ग़ज़ल जैसे |

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|