Monday 13 September 2010

आँखों-आँखों में

आँखों-आँखों में हुई एक छोटी सी बात,
हलकी सी मुस्कुराहट टिमटिमायी,
और बीच सड़क पर ग़ुलिस्ताँ महक उठी

पुरानी वाली:
आँखें मिलीं, एक मुस्कान महकी,
और फिर कायनात में कहीं
खो गयी

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