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सूई से क्या वफ़ा / سوٴی سے کیا وفہ

तेरा मुन्तज़िर घड़ी पर क्यों ग़ौर करे,
जब तू वक़्त की महकूम नहीं,
तेरी राह को तकती आँखों को
सूई से क्या वफ़ा?

تیرا منتزر گھڑی پر کےوں غور کرے،
جب تو وقت کی محکوم نہیں،
تیری راہ کو تکتی آنکھوں کو سوٴی سے کیا وفہ

Comments

Jandunia said…
शानदार पोस्ट
Ozymandias said…
Jandunia और Udan Tashtari, बहुत शुक्रिया आपका!