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दोहा

बोझ ढोते दर्द जो रोए, चादर ओढे सोए |
रामेश देखो चींटी को, काज कैसे होए ||

यह कृति उमर बहुभाषीय रूपांन्तरक की मदद से देवनागरी में टाइप की गई है|

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